रोहिणी नक्षत्र
रोहिणी नक्षत्र सौंदर्य, आकर्षक व्यक्तित्व और रचनात्मकता दर्शाता है।
- स्वामी ग्रह
- चंद्र · दशा 10 वर्ष
- देवता
- ब्रह्मा (प्रजापति)
- प्रतीक
- रथ
- गण
- मनुष्य गण
- योनि
- सर्प
- नाड़ी
- अंत्य नाड़ी
- राशि चक्र में स्थान
- वृषभ 10° – 23°20′
रोहिणी नक्षत्र में जन्मे लोगों का स्वभाव
परंपरा के अनुसार स्थिरता, कृषि, कला और सुख-सुविधा भरे जीवन की ओर झुकाव बताया जाता है।
रोहिणी के चार चरण
दशा क्रम
रोहिणी में जन्मे लोगों के लिए विंशोत्तरी दशाओं का क्रम:
- चंद्र 10 वर्ष
- मंगल 7 वर्ष
- राहु 18 वर्ष
- गुरु 16 वर्ष
- शनि 19 वर्ष
- बुध 17 वर्ष
- केतु 7 वर्ष
- शुक्र 20 वर्ष
- सूर्य 6 वर्ष
पहली दशा की शेष अवधि जन्म के समय नक्षत्र में चंद्र की स्थिति पर निर्भर करती है — सटीक तिथियों के लिए टूल का उपयोग करें।
कुंडली मिलान में
कुंडली मिलान में रोहिणी का गण (मनुष्य गण), योनि (सर्प) और नाड़ी (अंत्य नाड़ी) साथी के नक्षत्र से मिलाए जाते हैं। पूरे मिलान के लिए दोनों का जन्म विवरण चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
रोहिणी का स्वामी चंद्र है। इसमें जन्मे लोगों का विंशोत्तरी दशा चक्र चंद्र दशा (पूर्ण 10 वर्ष) से शुरू होता है; जन्म के समय शेष अवधि चंद्र के अंश पर निर्भर करती है।
रोहिणी का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
रोहिणी: मनुष्य गण, योनि सर्प, अंत्य नाड़ी। कुंडली मिलान (गण, योनि और नाड़ी कूट) में इन्हें देखा जाता है।
रोहिणी नक्षत्र के नामाक्षर कौन-से हैं?
परंपरा से चरण अनुसार (अवकहड़ा चक्र): 1 — ओ · 2 — वा · 3 — वी · 4 — वू।
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