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धनिष्ठा नक्षत्र

धनिष्ठा नक्षत्र संगीत, लय, धन और समूह के नेतृत्व को दर्शाता है।

स्वामी ग्रह
मंगल · दशा 7 वर्ष
देवता
अष्ट वसु
प्रतीक
मृदंग (ढोल)
गण
राक्षस गण
योनि
सिंह
नाड़ी
मध्य नाड़ी
राशि चक्र में स्थान
मकर 23°20′ – कुंभ 6°40′

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे लोगों का स्वभाव

स्वभाव उदार और सक्रिय होता है।

धनिष्ठा के चार चरण

चरण राशि अंश नवांश नामाक्षर
1 मकर 23°20′ – 26°40′ सिंह गा
2 मकर 26°40′ – 30° कन्या गी
3 कुंभ 0° – 3°20′ तुला गू
4 कुंभ 3°20′ – 6°40′ वृश्चिक गे

दशा क्रम

धनिष्ठा में जन्मे लोगों के लिए विंशोत्तरी दशाओं का क्रम:

  1. मंगल 7 वर्ष
  2. राहु 18 वर्ष
  3. गुरु 16 वर्ष
  4. शनि 19 वर्ष
  5. बुध 17 वर्ष
  6. केतु 7 वर्ष
  7. शुक्र 20 वर्ष
  8. सूर्य 6 वर्ष
  9. चंद्र 10 वर्ष

पहली दशा की शेष अवधि जन्म के समय नक्षत्र में चंद्र की स्थिति पर निर्भर करती है — सटीक तिथियों के लिए टूल का उपयोग करें।

कुंडली मिलान में

कुंडली मिलान में धनिष्ठा का गण (राक्षस गण), योनि (सिंह) और नाड़ी (मध्य नाड़ी) साथी के नक्षत्र से मिलाए जाते हैं। पूरे मिलान के लिए दोनों का जन्म विवरण चाहिए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

धनिष्ठा का स्वामी मंगल है। इसमें जन्मे लोगों का विंशोत्तरी दशा चक्र मंगल दशा (पूर्ण 7 वर्ष) से शुरू होता है; जन्म के समय शेष अवधि चंद्र के अंश पर निर्भर करती है।

धनिष्ठा का गण, योनि और नाड़ी क्या है?

धनिष्ठा: राक्षस गण, योनि सिंह, मध्य नाड़ी। कुंडली मिलान (गण, योनि और नाड़ी कूट) में इन्हें देखा जाता है।

धनिष्ठा नक्षत्र के नामाक्षर कौन-से हैं?

परंपरा से चरण अनुसार (अवकहड़ा चक्र): 1 — गा · 2 — गी · 3 — गू · 4 — गे।

यह पृष्ठ पारंपरिक वैदिक ज्योतिष की सामान्य जानकारी देता है। महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए अपनी पूरी कुंडली किसी योग्य ज्योतिषी से दिखवाएँ।

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