विशाखा नक्षत्र
विशाखा नक्षत्र लक्ष्य की ओर दृढ़ता से बढ़ने, महत्वाकांक्षा और संकल्प को दर्शाता है।
- स्वामी ग्रह
- गुरु · दशा 16 वर्ष
- देवता
- इंद्र और अग्नि
- प्रतीक
- तोरण द्वार
- गण
- राक्षस गण
- योनि
- व्याघ्र
- नाड़ी
- अंत्य नाड़ी
- राशि चक्र में स्थान
- तुला 20° – वृश्चिक 3°20′
विशाखा नक्षत्र में जन्मे लोगों का स्वभाव
धैर्य से काम करने पर लंबे समय तक टिकने वाली सफलता मिलती है।
विशाखा के चार चरण
दशा क्रम
विशाखा में जन्मे लोगों के लिए विंशोत्तरी दशाओं का क्रम:
- गुरु 16 वर्ष
- शनि 19 वर्ष
- बुध 17 वर्ष
- केतु 7 वर्ष
- शुक्र 20 वर्ष
- सूर्य 6 वर्ष
- चंद्र 10 वर्ष
- मंगल 7 वर्ष
- राहु 18 वर्ष
पहली दशा की शेष अवधि जन्म के समय नक्षत्र में चंद्र की स्थिति पर निर्भर करती है — सटीक तिथियों के लिए टूल का उपयोग करें।
कुंडली मिलान में
कुंडली मिलान में विशाखा का गण (राक्षस गण), योनि (व्याघ्र) और नाड़ी (अंत्य नाड़ी) साथी के नक्षत्र से मिलाए जाते हैं। पूरे मिलान के लिए दोनों का जन्म विवरण चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विशाखा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
विशाखा का स्वामी गुरु है। इसमें जन्मे लोगों का विंशोत्तरी दशा चक्र गुरु दशा (पूर्ण 16 वर्ष) से शुरू होता है; जन्म के समय शेष अवधि चंद्र के अंश पर निर्भर करती है।
विशाखा का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
विशाखा: राक्षस गण, योनि व्याघ्र, अंत्य नाड़ी। कुंडली मिलान (गण, योनि और नाड़ी कूट) में इन्हें देखा जाता है।
विशाखा नक्षत्र के नामाक्षर कौन-से हैं?
परंपरा से चरण अनुसार (अवकहड़ा चक्र): 1 — ती · 2 — तू · 3 — ते · 4 — तो।
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