रेवती नक्षत्र
रेवती नक्षत्र करुणा, दूसरों की देखभाल और यात्राओं में सुरक्षा दर्शाता है।
- स्वामी ग्रह
- बुध · दशा 17 वर्ष
- देवता
- पूषा
- प्रतीक
- मछली / ढोल
- गण
- देव गण
- योनि
- गज
- नाड़ी
- अंत्य नाड़ी
- राशि चक्र में स्थान
- मीन 16°40′ – 30°
रेवती नक्षत्र में जन्मे लोगों का स्वभाव
परंपरा के अनुसार इनमें कलात्मक रुचि और दूसरों का मार्गदर्शन करने का गुण बताया जाता है।
रेवती के चार चरण
दशा क्रम
रेवती में जन्मे लोगों के लिए विंशोत्तरी दशाओं का क्रम:
- बुध 17 वर्ष
- केतु 7 वर्ष
- शुक्र 20 वर्ष
- सूर्य 6 वर्ष
- चंद्र 10 वर्ष
- मंगल 7 वर्ष
- राहु 18 वर्ष
- गुरु 16 वर्ष
- शनि 19 वर्ष
पहली दशा की शेष अवधि जन्म के समय नक्षत्र में चंद्र की स्थिति पर निर्भर करती है — सटीक तिथियों के लिए टूल का उपयोग करें।
कुंडली मिलान में
कुंडली मिलान में रेवती का गण (देव गण), योनि (गज) और नाड़ी (अंत्य नाड़ी) साथी के नक्षत्र से मिलाए जाते हैं। पूरे मिलान के लिए दोनों का जन्म विवरण चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रेवती नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
रेवती का स्वामी बुध है। इसमें जन्मे लोगों का विंशोत्तरी दशा चक्र बुध दशा (पूर्ण 17 वर्ष) से शुरू होता है; जन्म के समय शेष अवधि चंद्र के अंश पर निर्भर करती है।
रेवती का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
रेवती: देव गण, योनि गज, अंत्य नाड़ी। कुंडली मिलान (गण, योनि और नाड़ी कूट) में इन्हें देखा जाता है।
रेवती नक्षत्र के नामाक्षर कौन-से हैं?
परंपरा से चरण अनुसार (अवकहड़ा चक्र): 1 — दे · 2 — दो · 3 — चा · 4 — ची।
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