अश्विनी नक्षत्र
अश्विनी नक्षत्र में जन्मे लोग तेज़, सक्रिय और दूसरों की मदद के लिए आगे आने वाले माने जाते हैं।
- स्वामी ग्रह
- केतु · दशा 7 वर्ष
- देवता
- अश्विनी कुमार
- प्रतीक
- अश्व का सिर
- गण
- देव गण
- योनि
- अश्व
- नाड़ी
- आदि नाड़ी
- राशि चक्र में स्थान
- मेष 0° – 13°20′
अश्विनी नक्षत्र में जन्मे लोगों का स्वभाव
परंपरा के अनुसार उनमें उपचार (चिकित्सा) और यात्रा से जुड़े कामों की स्वाभाविक क्षमता बताई जाती है।
अश्विनी के चार चरण
दशा क्रम
अश्विनी में जन्मे लोगों के लिए विंशोत्तरी दशाओं का क्रम:
- केतु 7 वर्ष
- शुक्र 20 वर्ष
- सूर्य 6 वर्ष
- चंद्र 10 वर्ष
- मंगल 7 वर्ष
- राहु 18 वर्ष
- गुरु 16 वर्ष
- शनि 19 वर्ष
- बुध 17 वर्ष
पहली दशा की शेष अवधि जन्म के समय नक्षत्र में चंद्र की स्थिति पर निर्भर करती है — सटीक तिथियों के लिए टूल का उपयोग करें।
कुंडली मिलान में
कुंडली मिलान में अश्विनी का गण (देव गण), योनि (अश्व) और नाड़ी (आदि नाड़ी) साथी के नक्षत्र से मिलाए जाते हैं। पूरे मिलान के लिए दोनों का जन्म विवरण चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
अश्विनी का स्वामी केतु है। इसमें जन्मे लोगों का विंशोत्तरी दशा चक्र केतु दशा (पूर्ण 7 वर्ष) से शुरू होता है; जन्म के समय शेष अवधि चंद्र के अंश पर निर्भर करती है।
अश्विनी का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
अश्विनी: देव गण, योनि अश्व, आदि नाड़ी। कुंडली मिलान (गण, योनि और नाड़ी कूट) में इन्हें देखा जाता है।
अश्विनी नक्षत्र के नामाक्षर कौन-से हैं?
परंपरा से चरण अनुसार (अवकहड़ा चक्र): 1 — चू · 2 — चे · 3 — चो · 4 — ला।
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