उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र प्रज्ञा, धैर्य और शांत स्वभाव दर्शाता है।
- स्वामी ग्रह
- शनि · दशा 19 वर्ष
- देवता
- अहिर्बुध्न्य
- प्रतीक
- जुड़वाँ / अर्थी का पिछला भाग
- गण
- मनुष्य गण
- योनि
- गौ
- नाड़ी
- मध्य नाड़ी
- राशि चक्र में स्थान
- मीन 3°20′ – 16°40′
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में जन्मे लोगों का स्वभाव
दूसरों को सलाह देने और लंबी अवधि की योजनाएँ बनाने की क्षमता होती है।
उत्तरा भाद्रपद के चार चरण
दशा क्रम
उत्तरा भाद्रपद में जन्मे लोगों के लिए विंशोत्तरी दशाओं का क्रम:
- शनि 19 वर्ष
- बुध 17 वर्ष
- केतु 7 वर्ष
- शुक्र 20 वर्ष
- सूर्य 6 वर्ष
- चंद्र 10 वर्ष
- मंगल 7 वर्ष
- राहु 18 वर्ष
- गुरु 16 वर्ष
पहली दशा की शेष अवधि जन्म के समय नक्षत्र में चंद्र की स्थिति पर निर्भर करती है — सटीक तिथियों के लिए टूल का उपयोग करें।
कुंडली मिलान में
कुंडली मिलान में उत्तरा भाद्रपद का गण (मनुष्य गण), योनि (गौ) और नाड़ी (मध्य नाड़ी) साथी के नक्षत्र से मिलाए जाते हैं। पूरे मिलान के लिए दोनों का जन्म विवरण चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
उत्तरा भाद्रपद का स्वामी शनि है। इसमें जन्मे लोगों का विंशोत्तरी दशा चक्र शनि दशा (पूर्ण 19 वर्ष) से शुरू होता है; जन्म के समय शेष अवधि चंद्र के अंश पर निर्भर करती है।
उत्तरा भाद्रपद का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
उत्तरा भाद्रपद: मनुष्य गण, योनि गौ, मध्य नाड़ी। कुंडली मिलान (गण, योनि और नाड़ी कूट) में इन्हें देखा जाता है।
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के नामाक्षर कौन-से हैं?
परंपरा से चरण अनुसार (अवकहड़ा चक्र): 1 — दू · 2 — थ · 3 — झ · 4 — ञ।
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