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शतभिषा नक्षत्र

शतभिषा नक्षत्र स्वतंत्र सोच, अनुसंधान और उपचार की क्षमता दर्शाता है।

स्वामी ग्रह
राहु · दशा 18 वर्ष
देवता
वरुण
प्रतीक
खाली वृत्त
गण
राक्षस गण
योनि
अश्व
नाड़ी
आदि नाड़ी
राशि चक्र में स्थान
कुंभ 6°40′ – 20°

शतभिषा नक्षत्र में जन्मे लोगों का स्वभाव

स्वभाव गोपनीय होते हुए भी गहरे ज्ञान की खोज में रहता है।

शतभिषा के चार चरण

चरण राशि अंश नवांश नामाक्षर
1 कुंभ 6°40′ – 10° धनु गो
2 कुंभ 10° – 13°20′ मकर सा
3 कुंभ 13°20′ – 16°40′ कुंभ सी
4 कुंभ 16°40′ – 20° मीन सू

दशा क्रम

शतभिषा में जन्मे लोगों के लिए विंशोत्तरी दशाओं का क्रम:

  1. राहु 18 वर्ष
  2. गुरु 16 वर्ष
  3. शनि 19 वर्ष
  4. बुध 17 वर्ष
  5. केतु 7 वर्ष
  6. शुक्र 20 वर्ष
  7. सूर्य 6 वर्ष
  8. चंद्र 10 वर्ष
  9. मंगल 7 वर्ष

पहली दशा की शेष अवधि जन्म के समय नक्षत्र में चंद्र की स्थिति पर निर्भर करती है — सटीक तिथियों के लिए टूल का उपयोग करें।

कुंडली मिलान में

कुंडली मिलान में शतभिषा का गण (राक्षस गण), योनि (अश्व) और नाड़ी (आदि नाड़ी) साथी के नक्षत्र से मिलाए जाते हैं। पूरे मिलान के लिए दोनों का जन्म विवरण चाहिए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शतभिषा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

शतभिषा का स्वामी राहु है। इसमें जन्मे लोगों का विंशोत्तरी दशा चक्र राहु दशा (पूर्ण 18 वर्ष) से शुरू होता है; जन्म के समय शेष अवधि चंद्र के अंश पर निर्भर करती है।

शतभिषा का गण, योनि और नाड़ी क्या है?

शतभिषा: राक्षस गण, योनि अश्व, आदि नाड़ी। कुंडली मिलान (गण, योनि और नाड़ी कूट) में इन्हें देखा जाता है।

शतभिषा नक्षत्र के नामाक्षर कौन-से हैं?

परंपरा से चरण अनुसार (अवकहड़ा चक्र): 1 — गो · 2 — सा · 3 — सी · 4 — सू।

यह पृष्ठ पारंपरिक वैदिक ज्योतिष की सामान्य जानकारी देता है। महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए अपनी पूरी कुंडली किसी योग्य ज्योतिषी से दिखवाएँ।

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