उत्तराषाढ़ा नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र ईमानदारी, धर्मनिष्ठा और लंबे समय तक टिकने वाली विजय की ओर बढ़ने की शक्ति दर्शाता है।
- स्वामी ग्रह
- सूर्य · दशा 6 वर्ष
- देवता
- विश्वेदेव
- प्रतीक
- हाथी दाँत
- गण
- मनुष्य गण
- योनि
- नकुल
- नाड़ी
- अंत्य नाड़ी
- राशि चक्र में स्थान
- धनु 26°40′ – मकर 10°
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्मे लोगों का स्वभाव
देर से ही सही, पर स्थायी सफलता मिलना इस नक्षत्र की विशेषता है।
उत्तराषाढ़ा के चार चरण
दशा क्रम
उत्तराषाढ़ा में जन्मे लोगों के लिए विंशोत्तरी दशाओं का क्रम:
- सूर्य 6 वर्ष
- चंद्र 10 वर्ष
- मंगल 7 वर्ष
- राहु 18 वर्ष
- गुरु 16 वर्ष
- शनि 19 वर्ष
- बुध 17 वर्ष
- केतु 7 वर्ष
- शुक्र 20 वर्ष
पहली दशा की शेष अवधि जन्म के समय नक्षत्र में चंद्र की स्थिति पर निर्भर करती है — सटीक तिथियों के लिए टूल का उपयोग करें।
कुंडली मिलान में
कुंडली मिलान में उत्तराषाढ़ा का गण (मनुष्य गण), योनि (नकुल) और नाड़ी (अंत्य नाड़ी) साथी के नक्षत्र से मिलाए जाते हैं। पूरे मिलान के लिए दोनों का जन्म विवरण चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
उत्तराषाढ़ा का स्वामी सूर्य है। इसमें जन्मे लोगों का विंशोत्तरी दशा चक्र सूर्य दशा (पूर्ण 6 वर्ष) से शुरू होता है; जन्म के समय शेष अवधि चंद्र के अंश पर निर्भर करती है।
उत्तराषाढ़ा का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
उत्तराषाढ़ा: मनुष्य गण, योनि नकुल, अंत्य नाड़ी। कुंडली मिलान (गण, योनि और नाड़ी कूट) में इन्हें देखा जाता है।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के नामाक्षर कौन-से हैं?
परंपरा से चरण अनुसार (अवकहड़ा चक्र): 1 — भे · 2 — भो · 3 — जा · 4 — जी।
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